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सात दिन में दीदी की चूत का फलूदा बना दिया

हेल्लो दोस्तों. मेरा नाम संजय हैं और मैं उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का रहने वाला हूँ. मै हमेशा से मस्ताराम डॉट नेट पढता रहा हु मस्तराम के बारे में मुझे एक दोस्त ने बताया था | ढेर सारे लोगो की कहानी पढ़ के मेरे मन में आया की मै भी अपनी कहानी लिखू सो लिख दिया ..  यह बात आज से कुछ ३ साल पहले की हैं जब मैं अपने काम के सिलसिले से दो हफ्तों के लिए मुंबई गया हुआ था. भांडुप में मेरी एक बुआ रहेती हैं जिसका नाम तृषा हैं. तृषा बुवा की दो बेटिया हैं जिस में बड़ी का नाम सरिता और छोटी का नाम चित्रा हैं. यहाँ किस्सा मेरे और सरिता दीदी के बिच में हुआ था, मैंने दीदी की चूत में अपने लंड के झंडे गाड़े थे. सरिता को मैं दीदी इसलिए बुलाता हूँ क्यूंकि मुझ से वो 2 महीने बड़ी हैं. उसकी चौड़ी छाती, बड़ी गोल गांड और सेक्सी आँखे किसी भी मर्द के लौड़े में तूफ़ान लाने के लिए काफी थी. मैंने दीदी की चूत तो इस चुदाई के पहले कभी देखी नहीं थी, पर पता था की दीदी की चूत अच्छी ही होंगी, क्यूंकि वो बहार से ही इतनी अच्छी दिखती थी. मुझे दीदी को चोदने के सपने तो कई दिनों से थे, लेकिन दीदी की चुदाई के लिए प्रोपर जगह और सिच्युएशन्स भी तो चाहिए. और ऐसी सिच्युएशन मुझे मिल ही गई. उस दिन मैं शाम को जल्दी घर आया था. तृषा बुवा निचे चित्रा को कंगी कर रही थी. मेरे आते ही बुवा ने मुझे बताया की मेरी माँ का फोन आया था. मैंने बुवा से कहाँ की ठीक हैं मैं उन्हें फोन कर दूंगा.उस समय मोबाइल का इतना चलन नहीं था इसलिए लेंडलाइन का ही व्यापक उपयोग होता था. मैंने तौलिया लिया और मैं नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया. मैं नहाने के बाद जब वापस आया तो मुझे सरिता दीदी के कमरे से कुछ आवाज आ रही थी. मैंने खिड़की के छेद से अंदर झाँका तो मेरे होश ही उड़ गए. सरिता ने लेपटोप पे गंदी तस्वीरें निकाली थी और वो चुदाई की इन तस्वीरों को देख के डिल्डो से मस्ती कर रही थी. दीदी की चूत वाला हिस्सा खुला हुआ था. हाँ उसने टॉप नहीं उतारा था लेकिन निचे के कपडे सरका दिए थे. उसकी चूत में एक काला डिल्डो अंदर बहार हो रहा था. और जब दीदी की चूत में डिल्डो पूरा घुसता था तो वो आह आह ओह ओह ऐसे आवाज निकालती थी. मैंने देखा की यहाँ से अच्छा नजारा मुझे दरवाजे के छेद से दिखेंगा क्यूंकि वो खिड़की के छेद से काफी बड़ा था. मैंने गेलरी से निचे झाँक के देखा के बुवा अभी कंगी आधी भी नहीं कर पाई थी. इसलिए मेरे पास दीदी की चूत देखने के लिए अभी भी कुछ समय था. मैं फट से दरवाजे के छेद पे सट के खड़ा हो गया और सरिता दीदी की शैतानी देखने लगा. इधर मेरा लंड भी उबाल मार रहा था. मुझे भी चूत मारे हुए एक जमाना हो गया था. आखिरी बार मैंने चूत में लंड कोलेज के आखिरी साल इ दिया था., जब मैं और मेरा दोस्त सुभास एक रंडी की चूत मारने के लिए गए थे. सरिता दीदी की चूत में डिल्डो अंदर जाता था और दीदी अपने चुंचे जोर से दबाती थी. वो एक साथ दोहरा मजा ले रही थी. उसकी चूत से निकलता हुआ कामरस डिल्डो को भिगो रहा था. और यह डिल्डो कोई उतना महंगा नहीं था. मैंने अपने तौलिये के अंदर से लंड को खड़े हो के दरवाजे पे टच करता महसूस किया. मैंने अंदर अंडरवेर नहीं पहनी थी इसलिए लौड़ा और भी कामुक लग रहा था. मैंने अब दीदी को देख के ही हस्तमैथुन करने का सोचा. लेकिन वहाँ खड़े खड़े मुठ मारने के दो नुकशान थे. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | पहला यह की मुठ बहार आ सकता था और फर्श साफ करना पड़ता. और दूसरा की अगर बुवा आ जाती तो दीदी की चूत की बजाय उसकी लात खानी पड़ती. मैं मन को मारता हुआ बाथरूम में वापस गया. अंदर से कड़ी लगा के मैंने दीदी को याद करते हुए मस्त मुठ मारी. साला लंड भी इतना उत्तेजित था की वो चार हाथ हलाने [पे सब वीर्य निकल गया. मैंने पानी डाल के वीर्य को गटर की और भेजा. मैंने तौलिये से लंड पोंछा और मैं वापस बहार आ गया. दरवाजे से अंदर देखा तो दीदी की चूत भी अब तृप्त हो चुकी थी. उसने भी कपडे वापस सरका लिए थे और वो अब लेपटोप पे गाने सुन रही थी. मैंने कपडे में ढीली पेंट और खुली हुई टी-शर्ट डाली और मैंने दीदी के कमरे को नोक किया. उसने दरवाजा खोलने से पहले पलंग पे पड़े डिल्डो को ठिकाने लगाया. उसने मुझे देख के अंदर बुलाया. मैं पलंग के उपर जाके बैठा और उस से बातें करने लगा. बातो बातों में मैंने उसे कहा, दीदी कुछ पूछना था, आप बतायेंगी. उसने कहा, हाँ पूछो, क्या पूछना हैं. मैंने उसे कहा की पहले प्रोमिस करो किसी को बताओगी नहीं. उसने कहा ठीक हैं, मैंने उसे पूछा की यहाँ डोक्टर शुक्ला नाम के एक डॉक्टर का क्लिनिक हैं भांडुप में वो कहाँ हैं. (वह एक बड़े सेक्सोलोजिस्ट का नाम था.) सरिता दीदी ने मेरी और अलग ही नजर से देखा और बोली, वो तो स्टेशन की दूसरी और पड़ता हैं. उसने बात चालू रखी, लेकिन तुम्हे वहाँ जाने की क्यों जरुरत आन पड़ी. अब वो हंसी और बोली, देखना मोनिका को पस्ताना ना पड़े (मोनिका मेरी मंगेतर का नाम हैं). मैंने कहाँ, नहीं दीदी ऐसी बात नहीं हैं, मेरा केस दरअसल उल्टा हैं, लेकिन मुझे बताने में शर्म आती हैं. दीदी को भी उत्तेजना होने लगी थी, उसने मुझे कहाँ, नहीं बताओ ना, कोई शरमाने की बात नहीं हैं, हम दोनों एडल्ट हैं अब तो इस हिसाब से तो हम दोस्त हैं. मैंने उसे कहा, दीदी मेरा लिंग बहुत पावरफुल हैं और मैं कम से कम 1 घंटा लेता हूँ. दीदी की आँखे खुली रह गई. वो जरुर सोच रही थी, की एक घंटे का लौड़ा मुझे मिले तो डिल्डो से पीछा छूटे. दीदी की आँखे खुल गई मेरी इस बात से. मैंने आगे कहा, दीदी मोनिका भी मुझ से हैरान हैं क्यूंकि एक घंटे तक आप समझ ही सकती हैं. इसलिए मैं डॉक्टर शुक्ला से मिल के कुछ पावर कम करने का सोच रहा हूँ. सरिता दीदी की जबान उसके होंठो पे फिरने लगी. उसे भी सेक्स चढ़ रहा था शायद. मैंने दीदी के बूब्स वाला हिस्सा देखा जिसमे अब कठनाई आ गई थी. दीदी की नजर मेरे लंड की तरफ ही थी. मैंने जानबूझ के अंदर अंडरवेर नहीं पहनी थी. उसने मेरे अकड़े हुए लंड को देखा. दीदी की चूत में भी जरुर खलबली मची होगी उस वक्त. उसने मुझे कहा, नहीं ऐसा नहीं हो सकता कोई एक घंटा कैसे कर सकता हैं भला, तुम मजाक कर रहे हो. मैंने कहा, नहीं सच में मैं क्यों जूठ बोलूँगा. उसने मुझे कहा, मैं नहीं मानती. मैंने कहा, आप कैसे मानोगी. उसने कहा, प्रेक्टिकली पता चलेगा तभी. मैंने नखरे दिखाते हुए कहा, हैं कोई आप के ध्यान में जो मेरे साथ प्रेक्टिकल करे. इतना कहते ही दीदी खड़ी हुई और उसने दरवाजे को अंदर से बंद किया और आते आते तो उसने अपनी टी-शर्ट खोल डाली. उसकी काली ब्रा में झूलते उसके चुंचे मस्त मादक लग रहे थे. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | वो बोली, आ जाओ मैं हूँ ना. दीदी ने तो अपने हाथ से ही अपनी टी-शर्ट उतारने के बाद अपनी ब्रा के हुक भी खोल दिए. उसने निचे के कपडे भी उतारे और वो बिलकुल नंगी हो गई. यह सब कुछ 20-25 सेकण्ड के अंदर ही निपट गया और मैं जैसे की कोई सपना देख रहा था. दीदी पलंग के निचे बैठी और उसने मेरे लंड को पकड़ा और बोली निकालो. मेरा ध्यान दीदी की चूत में लगा था. उसकी चूत मस्त चिकनी और बिना बालो की थी. उसकी सेक्सी जांघो के बिच में यह चूत किसी गुलाब के फुल की तरह खिली हुई थी. दीदी ने मेरे लौड़े को पकड़ के महसूस किया. 8 इंच का लौड़ा उसके हाथ में आते ही उसकी चूत के अंदर भी बिजली गिर गई होंगी. मैंने खड़े होक उसे मुझे नग्न करने में मदद की. दीदी ने सीधे ही मेरे लौड़े को अपने मुहं में ले लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मेरा पूरा के पूरा लंड उसने मुहं में भर लिया था और वो जोर जोर से लंड को चूसने लगी. मुझे भी उसके चूसने से बहुत मजा आ रहा था क्यूंकि वो लंड की तह तक चूस्सा लगा रही थी. मैंने दीदी के मुहं को दोनों हाथो से पकड़ा और मैंने उसे अब लंड के झटके उसके मुहं में देने लगा. उसके मुहं से अग्ग्गग्ग्ग ग्ग्ग्ग गग्ग आवाज आने लगी. मैंने और भी जोर से उसके मुहं की चुदाई चालू की. सरिता दीदी लंड के सभी झटके सह रही थी और उसके मुहं से अभी भी वहीँ आवाजे आ रही थी. मैंने अब लंड को उसके मुहं से बाहर निकाला और मैंने उसे उठा के पलंग के उपर डाल दिया. मैंने अब दीदी के साथ अब 69 पोजीशन बना ली और दीदी की चूत के अंदर डीप तक जबान डाल दी. उसने एक बार फिर मेरे लौड़े को अपने मुहं में भर लिया और वही इंटेंसिटी से चूस्सा देने लगी. मैंने अपनी जबान को दीदी के कलाईटोरिस के उपर लगा दी और मैंने उसके उपर जबान को फेरने लगा. दीदी को इस से  बहुत मजा आने लगा और वो अब मेरे लंड के गोलों को बारी बारी खिंच खिंच के चूसने लगी. मैंने दीदी की गांड के भाग को उसकी चूत चाटते चाटते हुए छुआ. दीदी के शरीर में जैसे की करंट सा दौड़ गया. मैंने भी ऊँगली के उपर थूंक लिया और चूत के होंठो को बहार खिंच के चूसते हुए एक ऊँगली गांड में दे दी. सरिता दीदी की चूत से मस्त पानी निकल गया. क्यूंकि मैं एक साथ दीदी की चूत, गांड और मुहं को उत्तेजना दे रहा था. मैंने उस खारे खारे पानी को अपनी जबान पे महसूस किया और फिर मैंने दीदी की चूत से अपने होंठ बाहर निकाले. दीदी अब थोड़ी तृप्त दिख रही थी. अब दीदी को मैंने उसकी टाँगे फैलाने को कहा और मैंने लौड़े को हाथ में पकडे हुए दीदी की चूत के होंठो के उपर लंड को उपर निचे करने लगा. दीदी को बड़ा नशा चढ़ा हुआ था. वो बोली, संजय मुझे मत तडपाओ प्लीज़, अपने इस औजार से मेरी चूत को फाड़ दो आज. मुझे तुम्हारे वीर्य से नहला दो आज. मैंने कहा, दीदी इतनी भी क्या जल्दी हैं अभी तो पुरे एक हफ्ते तुम्हे चोदुंगा, पुरे मजे ले ले के चुदवाओ. मेरे होते हुए तुम्हे अपनी चूत इ डिल्डो लेना पड़े अच्छा नहीं लगता. मेरे मुहं से डिल्डो वाली बात ऐसे ही निकल पड़ी और दीदी भांप गई की मैं उसे हस्तमैथुन करते देख चूका था. उसने कहा, संजय कुत्ते तू झाँक रहा था अंदर. मैंने लंड के सुपाड़े को दीदी की चूत के अंदर डालते हुए कहा, अरे दीदी आप को परेशानी में देखा तभी तो अपने लंड का हथोडा आप की चूत के लिए गर्म कर के ले के आया हूँ. चूत के अंदर मोटे लंड के सुपाड़ा जाते ही दीदी की चूत फटने लगी उसके मुझे कस के जकड़ लिया और बोली, अरे संजय तेरे लंड में बड़ी ताकत हैं रे. कहाँ से जुटाई हैं. मैंने दीदी के दोनों बूब्स को हाथ में लिया और उसे कहा, दीदी लंड पहले से ही ताकतवान हैं, मोनिका की चीखे आप सुन लेती तो आप जान लेती. दीदी ने अपनी चूत के अंदर अबी मेरा पूरा के पूरा लंड भर लिया था. वो अपने कुले हिला हिला के मुझ से चुदवाने लगी थी. मैंने दीदी को मिशनरी पोजीशन में ही 20 मिनिट तक चोदा, इस बिच दीदी की चूत 2 बार झड चुकी थी. उसकी हालत अब ख़राब हो चुकी थी और उस से अब गांड भी जोर से नहीं हिलाई जा रही थी. मैंने उसके होंठो से अपने होंठ लगा दिए और उसे जोर जोर से चूमने और चोदने लगा. दीदी के मुहं से ह्ह्ह ह्ह्ह ओह आह आह्ह आहाह्ह्ह्ह ऐसी आवाज निकल के मेरे होंठो में घुट रही थी. दीदी की चूत अब जवाब दे चुकी थी. मैंने दीदी को और 5 मिनिट ऐसे ही लंड से धक्के दे दे के दबोचा. अब मैंने अपने लंड को दीदी की चूत से बहार निकाला और उसे उल्टा लिटा दिया. उसकी बड़ी गांड को मैंने दोनों हाथो से खोला और उसकी गांड के छेद के उपर आआथू कर के थूंक दिया. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैंने सुपाड़े को अब धीमे धीमे दीदी की गांड के ऊपर रगडा. दीदी बोली, अरे संजय मेरी वर्जिन गांड भी नहीं छोड़ेंगा तू तो. मैंने कहा दीदी अभी एक घंटे में कुछ वक्त बाकी हैं. गांड में ही देना पड़ेगा नहीं तो मेरा स्खलन होगा ही नहीं. दीदी बोली, ठीक हैं दे दे तू मेरी गांड के अंदर भी, लेकिन आहिस्ता आहिस्ता करना नहीं तो मेरी गांड फट जाएगी तेरे इस टारजन जैसे लौड़े से. मैंने कहा, दीदी आप चिंता ना करो. मैंने और एक बार दीदी की गांड के उपर थूंक दिया और फिर धीरे से लंड के सुपाड़े को अंदर घुसा दिया. दीदी की चीख निकल पड़ी, मैंने उसके मुहं पे अपना हाथ ना दबाया होता तो तृषा बुवा जरुर आ जाती. चित्रा भी अभी टयूशन गई होगी इसलिए टेंशन नहीं था. दीदी से रहा नहीं जा रहा था. मैंने 5 मिनिट तक लंड को ऐसे ही 20% जितना अंदर रहने दिया और फिर हलके हलके दीदी की गांड में लंड प्रवेश चालू किया. अब की बार सरिता दीदी को इतना दर्द नहीं हुआ. वो भी गांड को दोनों हाथो से चौड़ी कर के लंड अंदर लेने लगी. कुछ ही देर में मेरा पूरा के पूरा लंड उसकी गांड में घुस गया और मैं फकफक कर के उसकी गांड को ठोकने लगा. दीदी की चूत के जैसे ही उसकी गांड भी बड़ी सेक्सी थी. मेरा लंड उसकी गांड के अंदर में तह तक डालता था और फिर वापस खिंच लेता था. गांड की सख्ती की वजह से मुझे लगा की मैं झड़ जाऊँगा. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की चूत में डाली और जोर जोर से उसकी गांड मारने लगा. दीदी बोली,आह आह संजय आह आह चोदो अपनी दीदी को आह आह और जोर ससे याह्ह आय्ह्ह यस्सस….बना दो मेरी गांड का गोदाम और चूत की चटनी. आह आह आह्ह ओह ओह मैंने दीदी की चूत में अब दूसरी ऊँगली भी डाल दी. आह ओह ओह यस्स्स्ससस्स यस ओह ओह आऊ….करती हुई दीदी एक बार फिर मेरे उँगलियों के उपर झड गई. इधर मेरे लौड़े ने भी दीदी की गांड में दम तोड़ दिया. मैंने दीदी के उपर ही सो गया. 2 मिनिट के बाद मेरा लंड चूहे की तरह सिकुड़ के गांड से बाहर आ गया. मैंने अपनी उंगलियों को दीदी की चूत से हटाया और खड़ा हो के कपडे पहनने लगा. दीदी ने भी कपडे पहन लिए और वो बोली, तू तो सही में शक्तिशाली हैं रे, मोनिका की तो माँ चोद देगा तू. उसने आगे कहा, लेकिन तू मुझे भी खुश कर दिया कर. अगर तू मुंबई नहीं आ सकता तो मैं वहाँ आ जाउंगी कभी कभी. मैंने कहा, दीदी की चूत के लिए तो मेरा लंड सदा तैयार हैं. हम लोग निचे गए और जैसे कुछ हुआ ही ना हो ऐसे फिर से भाई बहन बन गए. अगले सात दिन तक रोज मैंने दीदी की चूत का फालूदा निकाला | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |  और अब दीदी जब भी गाव आती है मुझसे चुदे बिना नही रहती | पर एक बात उनमे है अभी तक इतनी चुदाई होने के बाद भी दीदी की चूत एकदम कसी कसी रहती है | दोस्तों मेरी सच्ची कहानी कैसी लगी जरुर बताना |

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गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें



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