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लाडली बहन की चुदाई का राज

प्रेषक: हिरल तोमर

मैं हूँ हिरल तोमर, आप की सेवा में. बात ये हुई के एक साल पहले मेरी मौसी ने मुझे अपने गाँव बुलाया था. वहाँ मैं पंद्रह दिन रहा. बिच मैने उनकी बेटी मुन्नी को कस कर चोदा. मेरी ये पहली चुदाइ थी. हम दोनो ने एक दूजे से वचन दिया था की चुदाइ का राज़ हम किसी से नहीं कहेंगे. लेकिन मुन्नी ने अपना वचन तोड़ दिया. दो महीनो पर मेरी बहन सुषमा को मौसी के घर जाना हुआ, मुन्नी ने कुछ व्रत रक्खा था. उस वक़्त मुन्नी ने सुषमा से बता दिया की कैसे हम ने चुदाइ की थी. जब सुषमा वापस आई तब ख़ुद चुदवाने के लिए बेताब हो चुकी थी. छोटी बहन को चोदा कहानी में आप ने पढ़ा की कैसे सुषमा ने मुझ से चुदवाया. अब मैं मूल कहानी पर आता हूँ एक साल पहले गरमिकी छुट्टियाँ के दौरान मौसी ने मुझे अपने गाँव बुला लिया. मैं वहाँ पहुँचा तब पता चला की मौसा बिज़नेस वास्ते मुंबई गये थे और एक्जामिनेशन आती होने से परेश दो हपते बाद आने वाला था. मुन्नी की एक्जामिनेशंस ख़त्म हो गयी थी इसी लिए वो आ गयी थी. मैं थोड़ा नाराज़ हुआ लेकिन क्या कर सकता था ? मुन्नी और मौसी मुझे मिल कर बहुत ख़ुश हुए. ये मेरे मौसा बिहारिलाल और मौसी भानुमति कई बरसों पहले ईस्ट अफ़्रीका गये थे. वहाँ उन्हों ने बहुत पैसे कमाए. परेश और मुन्नी वहाँ जन्मे और बड़े हुए. तीन साल पहले मौसा को अचानक वापस इंडिया लौटना पड़ा. आते ही अपने गाँव में चार मज़ले का बड़ा मकान बनवाया. मुंबई में रहते उन के एक दोस्त के साथ मिल कर उन्हों ने काग़ज़ का हॉल सेल बिज़नेस खड़ा कर दिया. इन के अलावा गाँव में मौसा का एक भतीजा था गंगाधर जिसे मैं जानता था. गंगाधर की पत्नी नरेश भाभी को भी मैं पहचानता था. वो दोनो भी मुझ से मिल कर ख़ुश हुए. पहले ही दिन शाम का खाना खा लिया था की गंगाधर और नरेश भाभी मुझ से मिल ने आए. हम चारों दूसरे मज़ले पर दीवान खाने में बैठ इधर उधर की बातें कर ने लगे. नरेश : हिरल भैया, आप तो हमारे परेश भैया जैसे ही देवर हें, मुझे भाभी कहना. मैं : ठीक है भाभी. नरेश : आप डाक्टरी पढ़ते हें ना ? कितने ? पाँच साल में डाक्टर बन जाएँगे ? मैं :हाँ, बीच में फैल ना हो जा उन तो. नरेश : मैं आप की पहली मरीज़ बनूँगी, मेरा इलाज करेंगे ना ? मैं : क्यूं नहीं ? फ़िस लगेगी लेकिन. नरेश : देवर हो कर भाभी से फ़िस लेंगे आप ? मैं तो आप से फ़िस मागुंगी. मैं : ऐसी कौन सी बीमारी है जिस के इलाज में फ़िस लेने के बजाय डाक्टर फ़िस देता है ? मुन्नी और गंगाधर मुस्कुराते रहे थे, मुन्नी बोली : भाभी, तेरा इलाज के वास्ते हिरल भैया को पूरे क्वालीफ़ाइड डाक्टर बनाने की ज़रूरत कहाँ है ? पूछ देख उन के पास ईन्जेक्शन है ? मैं : ईन्जेक्शन देना मैं सिख गया हूँ दे सकूंगा. मुन्नी और नरेश दोनो खिल खिल हस पड़े, गंगाधर बोले : मज़ाक कर रही है ये दोनो, हिरल, उनकी बातों में मत आना. मैं : कोई बात नहीं, मेरी भाभी जो बनी है हाँ, अब बताइए आप को क्या तकलीफ़ है नरेश : साब, खाना खाने के बाद भूख नहीं लगती और दिन भर नींद नहीं आती. मुन्नी लंबा मुँह किए बोली : हर रोज़ ईन्जेक्शन लेती है फिर भी. और ईन्जेक्शन भी कैसा ? बड़ी लंबी मोटी सुई वाला. लगाने में आधा घंटा लगता है मेरे दिमाग़ में अब बत्ती चमकी. मैने पूछा : सुई कैसी है ? नोकदार या बुत्ठि ? मुन्नी : बुत्ठि. और दवाई ऐसे अंदर से नहीं निकलती. सुई अंदर बाहर करनी पड़ती है मैने भी सीरीयस मुँह बना कर कहा : मुन्नी, ईन्जेक्शन देनेवाला कोई, लेनेवाली भाभी, तुझे कैसे पता चला की सुई कैसी है कितनी लंबी है कितनी मोटी है ? मुन्नी शरमा गयी कुछ बोली नहीं. नरेश ने कहा : मुन्नी ईन्जेक्शन ले चुकी है मैं : अच्छा ? किस ने लगाया ? सब चुप हो गये थोड़ी देर बाद नरेश ने कहा : मुन्नी ख़ुद आप को बताएगी, जब उस का दिल करेगा तब. मैं : मैं समाज सकता हूँ शरमाने की अब मेरी बारी थी. मैं कुछ बोला नहीं. नरेश : हाए हाए, अभी आप कच्चे कंवारे हें. मुन्नी, कौन स्वाद चखाएगी हिरल भैया को, मैं या तू ? गंगा : तुम दोनो छोड़ो उसे. उसे तय करने दो ना. क्यूं हिरल ? नरेश तेईस साल की है और मुन्नी उन्नीस की. कौन पसंद है तुझे ? मैं : मुझे तो दोनो पसंद है गंगा : देख, तेरे पास एक लंड है है ना ? वो एक समय एक चूत में जा सकता है दो में नहीं. तुझे तय करना होगा की समझ गया ना ? इस वक़्त मुन्नी उठ कर चली गयी मैने कहा : रुठ गयी क्या ? नरेश : ना ना. अपने बड़े भैया के मुँह से लंड चूत ऐसा सुनना नहीं चाहती. गंगा : अजीब लड़की है लंड ले सकती है लेकिन लंड की बातें सुन नहीं सकती. नरेश : इस में नयी बात क्या है ? लंड लेती है चूत, सुनता है कान. ये ज़रूरी नहीं है की चूत को जो पसंद आए वो कान को भी पसंद आए. रात के बारह बजाने को थे. मुन्नी आई नहीं. गंगाधर और नरेश चले गये सोने के लिए मुझे तीसरे मज़ले पर कमरा दिया था, जो मकान के पिछले भाग में था. बाथरूम में जा का पहले मैने मुठ मार कर लंड का प्रेशर कम किया, फिर रूम में आ कर सो गया. मेरे कमरे के पीछे गच्छी थी. मुझे नींद आने लगी थी की मैने कुछ आवाज़ गच्छी से आती सुनी. मैं सोचने लगा कौन हो सकता है गच्छी में इतनी रात ? उठ कर मैं बाहर निकला. गच्छी में कोई था नहीं. अब हुआ क्या था की आवाज़ बगल वाले मकान से आ रही थी. ये मकान दो मज़ले का था उस का छाता हमारी गच्छी के लेवेल में था. मैने देखा की छाते के थोड़े से टाइल्स जो पुराने ढंग के थे वो हट गये थे. वहाँ से रोशनी आ रही थी और आवाज़ भी. मैं दबे पाँव जाकर देखने लगा. बगल वाले मकान का बड़ा कमरा दिखाई दिया. तीन औरतें और दो आदमी सोने की तैयासुषमाँ कर रहे थे. उन को छोड़ मैं अपनी चारपाई में लेट कर सो गया. दूसरे दिन पता चला की बाजू वाले मकान में जो फेमिली रहता था उस के मंज़ले लड़के की शादी थी. उसी दिन दोपहर को बारात चली, दूसरे गाँव गयी और तीसरे दिन दुल्हन लिए वापस आई. मुझे अकेला पा कर मुन्नी ने कहा : भैया, आज रात खेल पड़ेगा. देखना है ? मैं : कौन सा खेल ? हसती हुई मुन्नी बोली : अब अनजाने मत बनी ये. आप को पता तो है की गच्छी से बगलवाले मकान का कमरा देखा जा सकता है मैं : उस का क्या ? मुन्नी : उस का ये की आज रात वहाँ सुहाग रात मनाई जाएगी. मांझाला लड़का जो कल शादी कर के आया है वो उस कमरे में अपनी दुल्हन को ……. को …….. वो करेगा. मुन्नी शर्म से लाल लाल हो गयी मैं : तुझे कैसे पता ? मुन्नी : वो कमरे में सब से बड़ा भैया अपनी बहू के साथ सोता है वो उनका बेडरूम है कई बार मैने और परेश ने देखा है उनको वो करते हुए. थोड़ा सोच कर मैने कहा : मुझे दुसरी जगह देना सोने के लिए और तू जा कर उनकी चुदाइ देखना. मुन्नी : नहीं भैया, अकेले देखने में क्या मझा ? आप को इतराज़ ना हो तो हम साथ में देखेंगे ? मैं : मुन्नी, ऐसा करना ख़तरे से ख़ाली नहीं है मौसी को पता चल गया तो क्या होगा ? मुन्नी : उस की फिकर मत कीजिए. मम्मी रात के नौ बजे सो जाती है जोड़ों में दर्द के कारण कभी सीढ़ी चढ़ती नहीं है और सुहाग रात दस बारह बजे से पहले शुरू होने वाली नहीं है मैं भी सो जा उंगी, लेकिन बारह बजे उठ जा उंगी. मैं : वो तो सही लेकिन उन को देख तुझे दिल हो गया तो क्या करोगी ? मेरे गले में बाहें डाल आँखों में आँखें डाल वो बोली : आप वहीं होंगे ना ? या ……. नरेश भाभी मुझ से ज़्यादा अच्छी लगती है ? अब बात ये थी की मुन्नी वैसे तो एक सामान्य लड़की थी. मैं भी इतना ख़ूबसूरत नहीं हूँ वैसे भी लड़कियाँ मुझ पर दुसरी नज़र डालती नहीं है मौक़ा मिला था चुदाइ का. क्यूं ना मैं लाभ उठा लूं ? आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | बहन या ना बहन, वो ख़ुद आ कर चुदवाना मांगती हो तो मना करने वाला मैं कौन भला ? चुदाइ की सोचते ही मेरा लंड तन ने लगा. मुन्नी की कमर पकड़ कर मैने उसे खींच लिया. वो मुझ से लिपट गयी उस की चुचियाँ मेरे सीने से दब गयी और मेरा लंड हमारे पेट बीच फ़स गया. उस का कोमल बदन बाहों में लेना मुझे बहुत मीठा लगा. लड़की इतनी मीठि हो सकती है वो मैने पहली बार जाना. ख़ैर, उस रात मैं कई चिझें पहली बार जानने वाला था. मेरे होटों पर हलका सा चुंबन कर के मेरी बाहों से छूट कर वो भाग गयी मैं सोचता रह गया की इतनी थोड़ी सी छेड़ छाड़ इतनी मीठि लगी तो पूरी चुदाइ कितनी मझेदार होगी. बाथरूम में जा कर मुझे मुठ मारनी पड़ी. बड़ी इंतेजारी से मैं रात की राह देखने लगा. इतना इंतेज़ार तो वो दूल्हा दुल्हन भी नहीं करते होंगे. वैसे भी मेरी भी ये पहली चुदाइ होने वाली थी ना ? मुन्नी मुझे चोदने दे तब ? सारा दिन मेरी बेचैनी देख मुन्नी मुस्कुराती रही. एक दो बार उस ने अपनी चुचिया दिखा दी. मेरा लंड बेचारा खड़ा हुआ सो गया,, खदा हुआ, सो गया, लार टपकाता रहा. आख़िर हम ने शाम का खाना खा लिया. सब सो ने चले गये मेरी आँखों में नींद कहाँ ? दो तीन बार जा कर देख आया की उस बेडरूम में क्या हो रहा है दस बजे मुन्नी आई. मैने उसे बाहों में लेना चाहा लेकिन वो बोली ; जल्द बाज़ी में मज़ा नहीं आएगा. थोड़ा सब्र करो. मैं तुमारी ही हूँ आज की रात. मैं : मौसी को पता चल जाएगा तो ? मुन्नी : तो कुछ नहीं. वो गाँव में ढिंढोरा नहीं पिटेगी. मैं : एक किस तो दे. मुन्नी : किस अकेली ही. ज़्यादा कुछ करोगे तो मैं चली जा उंगी. मैने मुन्नी के होठ मेरे होठ से छुए. हाय, कितने कोमल और मीठे थे उस के होठ ? क्या करना वो मैं जानता नहीं था होठ छुए खड़ा रहा. मुन्नी को लेकिन पता था. उस ने ज़ोर से होठ से होठ रगड दिए और अपना मुँह खोल मेरे होठ मुँह में लिए चाटे और चुसे. मुझे गंदा लगा लेकिन मीठा भी लगा. छूट ने का प्रयत्न किया मैने लेकिन मुन्नी ने मेरा सिर पकड़ रक्खा था. पूरी एक मिनिट चुंबन कर वो छूटी और बोली : आहह्ह्ह, मझा आ गया. है ना ? पहली बार किस किया ना तुमने ? बोले बिना मैने फिर से किस की. इस वक़्त मुन्नी ने अपनी जीभ निकाल कर मेरे होठ पर घुमाई. ओह, ओह, क्या उस का असर ? मेरा लंड ऐसा तन गया की मानो फट जाएगा. मुन्नी ने पाजामा के आरपार लंड पकड़ कर कहा : भैया, तुमारा ये तो अब से तैयार हो गया है मुझ से बरदाश्त नहीं हुआ. मैने उसे अलग किया और कहा : चली जा मुन्नी. मुझे यूँ तडपाना हो तो बहेतर है की तू चली जा. उस ने मेरा चहेरा हाथों में लिया. कुछ कहे इस से पहले मैने हाथ हटा दिए और फिर कहा : चली जा, चोदे बिना इतने साल गुज़ारे हें, एक दो साल ओर सही. मर नहीं जा उंगा मैं चोदे बिना. मेरा हाथ पकड़ कर अपने स्तन पर रखते हुए वो बोली : नाराज़ हो गये क्या ? चलो अब मैं नहीं उकसा उंगी. माफ़ कर दो. अब सच कहो, तुम्हे चोदने का दिल हुआ है की नहीं ? मैं : हुआ भी हो तो तुझे क्या ? इतने में गच्छी से लड़कियों की खिल खिल हस ने की आवाज़ आई. मुन्नी ने कहा : चलो, अब खेल शुरू होने वाला है हम गच्छी में गये वो आगे खड़ी रही और मैं पीछे. कमरे में दुल्हन पलंग पर बैठी थी और दूल्हा उस के पीछे बैठा था. उस के हाथ दुल्हन के कंधों पर थे. उस ने दुल्हन के कान में कुछ कहा. दुल्हन शरमाई लेकिन उस ने सिर हिला कर हा कही. चहेरा घुमा कर दूल्हे ने दुल्हन के मुँह से मुँह चिपका दिया. किस लंबी चली. दौरान कंधे पर से उतर कर दूल्हे के हाथ दुल्हन के स्तनों पर जा बैठे. दुल्हन ने अपने हाथ उन के हाथ पर रख दिए चुंबन करते करते दूल्हा ने चोली के बटन खोल दिया और खुली हुई चोली के अंदर हाथ डाल कर नंगे स्तन थाम लिए दुल्हन दूल्हे के सीने पर ढल गयी मैं मुन्नी के पीछे खड़ा था. मेरे हाथ भी उस के कंधों पर टीके थे. उधर दूल्हे ने स्तन पकड़े तो इधर मैने भी मुन्नी के स्तन पकड़ लिया. मुन्नी ने मेरे हाथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैं माना नहीं. थोड़ी नू ना के बाद उस ने मुझे स्तन सहालाने दिए लेकिन जब मैने नाइटी के हूक्स पर हाथ लगाया तब वो बोली : अभी नहीं, अंदर चलेंगे तब खोलना. इस बार मैने हार कबुल कर ली. वैसे भी नाइटी पतले कपड़े की बनी हुई थी और मुझे यक़ीन था की मुन्नी ने उस वक़्त ब्रा पहनी नहीं थी, इसी लिए मेरी उंगलियाँ मुन्नी की कड़ी नीपल मेहसूस कर सकती थी. दोनो हथेलिओं में स्तन भर के मैने उठाए, हलके से दबाए और सीने पर घुमाए. मुन्नी के मुँह से आह निकल पड़ी. उधर दूल्हा भी ऐसे ही स्तन सहला रहा था. मुन्नी अब थोड़ा पीछे सरकी. उस की गांड मेरी जाँघ से लग गयी मेरा लंड उस की कमर से डब गया. चहेरा घुमा कर किस करने लगी दूल्हा राजा ने अपनी रानी की चोली उतार फैंकी थी और उसे चित लेटा दिया था. दुल्हन ने अपना चहेरा ढक रक्खा था. बगल में बैठ दूल्हा उस के स्तन साथ खेल रहा था. नीचे झुक कर वो नीपल्स भी चुस ता था. होले होले उस का हाथ दुल्हन के पेट पर आया और वहाँ से घाघरी की नाडी पर पहुँचा. दुल्हन ने नाडी पकड़ ली. दूल्हा ने लाख समझाई , मानी नहीं. आख़िर दूल्हा उठा और अलमारी से कुछ ले आया. दुल्हन बैठ गयी दूल्हा ने कुछ नेकलेस जैसा दुल्हन को पहनाया. ख़ुश हो कर दुल्हन दूल्हा से लिपट गयी उसे बाहों में भर कर दूल्हा अब पलंग पर लेट गया. मुँह पैर किस करते करते फिर उस ने घाघरी की नाडी टटोली. इस बार दुल्नने घाघरी पकड़ ली सही लेकिन नाडी खोलने दी और कुले उठा कर घाघरी निकाल देने में सहकार दिया. ताजुबी की बात ये थी की दुल्हन ने पेंटी पहनी नहीं थी. घाघरी हटते ही उस की गोरी गोरी चिकानी जांघें और काले झांट से ढकी हुई चूत खुली हो गयी इधर मुन्नी ने भी पेंटी पहनी नहीं थी. मुझे कैसे मालूम ? जनाब, पहल मुन्नी ने की थी, अपना हाथ पीछे डाल कर मेरा लंड पकड़ कर. अब आप ही बताइए, वो मेरा लंड थाम सके तो मैने क्यूं ना उस की चूत की ख़बर ले सकूँ ? मेरी उंगलया चूत सहलाती थी लेकिन मेरी कलाई पकड़े हुए मुन्नी मुझे दिखाती रही थी की कहाँ उसे सहलवाना था.

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें



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