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जीजा के साथ पहली सुहागरात

प्रेषिका : रिंकल प्रजापति

मैं रिंकल हूँ इस साल मेरी शादी होने वाली है. मैं छोटे एक कस्बे की सीधी साधी लड़की हूँ. सुंदर और भरे बदन की मालिका. जो भी देखता बस देखता ही रह जाता. काफ़ी मनचलों ने डोरे डालने की कोशिश की मगर मैं हमेशा अपना दामन बचा कर चलती थी. मैने ठान रखा था कि अपना बदन सबसे पहले अपने पति को ही सौंपूँगी. मगर किस्मत मे तो कुछ और ही था. मेरी एक बड़ी बहन भी है गिरिजा. गिरिजा दीदी की शादी को चार साल हो गये थे. मेरा जीजा राकेश बहुत ही हॅंडसम आदमी है. बातें इतनी अच्छी करते हैं कि सुनने वाला बस उनके सम्मोहन मे बँधा रह जाता है. दीदी के मुँह से उनके बहुत किस्से सुन रखे थे. उनकी शादी से पहले कई लड़कियों से उनके संबंध रह चुके थे. कई लड़कियों से वो संभोग कर चुके थे. मैं शुरू शुरू मे उनपर बहुत फिदा थी. आख़िर साली जो ठहरी. मगर उनके कारनामे सुनने के बाद उनसे सम्हल कर रहने लगी. मैने देखा था कि वो मुझसे हमेशा चिपकने की कोशिश करते थे. मोका ढूँढ कर कई बार मुझे बाहों मे भी भर चुके थे. एक दो बार तो मेरी चूचियो को अपनी कोहनी से दाब चुके थे. मैं उनसे दूरी रखने लगी. मगर शिकारी जब देखता है कि उसका शिकार चोकन्ना हो गया है तो उसे पकड़ने के लिए तरह तरह की चाल चलता है. और निरीह शिकार उसके चालों को ना समझ कर उसके जाल मे फँस जाता है. मेरे संबंध की बातें चल रही थी. मम्मी पापा को किसी लड़के को देखने दूर जाना था. दो दिन का प्रोग्राम था. घर पर मैं अकेली रह जाती इसलिए उन्हों ने दीदी और जीजा को रहने के लिए बुलाया. वैसे मैने उनसे कहा कि मैं अकेली रह जाउन्गि लेकिन अकेली जवान लड़की को कोई भी माता पिता अकेले नही छोड़ते. दीदी और जीजा के आने के बाद मेरे मम्मी पापा निकल पड़े. जैसा मैने सोचा था उनके जाते ही राकेशजी मेरे पीछे लग गये. द्वि अर्थी बातें बोल बोल कर मुझे इशारा करते. दीदी उनकी बातें सुन कर हंस देती. मैं दीदी से कुछ शिकायत करती तो वो कहती कि जीजा साली के संबंधो मे ऐसा चलता ही रहता है. राकेश जी पर किसी बात का कोई असर नही होता था. मैं उनकी हरकतों से झुंझला उठी थी. उस दिन मैं नहा कर निकली तो राकेश जी ने मुझे अपनी बाहों मे भर कर मेरे बालों मे अपना चेहरा घुसाकर सुगंध लेने लगे. मैं गुस्से से तिलमिला उठी और उन्हे धकेलते हुए उनसे छिटक कर अलग हो गयी. “आप अपनी हदों मे रहिए नही तो मैं मम्मी पापा से शिकायत कर दूँगी” “मैने ऐसा क्या किया है. बस तुम्हारे बालों की महक ही तो ले रहा था.” कहकर राकेशजी ने वापस मुझे पकड़ना चाहा. “खबरदार अपने हाथ दूर रखिए. मुझे छूने की भी कोशिश मत करना” मगर वो बिना मेरी बातों की परवाह किए अपने हाथ मेरी तरफ बढ़ाए. मैं अपने को सिकोडते हुए ज़ोर से चीखी”दीदी” दीदी किचन से निकल कर आई. “क्या हुआ क्यों शोर मचा रही है” “दीदी, जीजाजी को समझा लो. वो मेरे साथ ग़लत हरकतें कर रहे हैं.” दीदी ने उनकी ओर देखते हुए कहा, “क्यों रिंकल को परेशान कर रहे हो” “मैं क्या परेशान कर रहा हूँ? पूछो इससे मैने ऐसी कौन सी हरकत की है जो ये बिदक उठी” “दीदी ये मुझे अपनी बाहों मे लेकर मेरे बदन को चूमने की कोशिश कर रहे थे.” “ग़लत बिल्कुल ग़लत. मैं तो अपनी इस खूबसूरत साली के बालों पर न्योछावर हो गया था. मैं तो बस उसके सुंदर सिल्की बालों को चूम रहा था. पूछो रिंकल से अगर मैने इसके बालों के अलावा कहीं होंठ लगाए हों तो” इससे पहले की दीदी कुछ बोलती मैं बोल उठी, “नही दीदी ये आपके सामने झूठ बोल रहे हैं. इनकी कोशिश तो मेरे बदन से खेलने की थी.” दीदी ने जीजा जी की तरफ देखा तो वो कह उठे “तुम्हारी कसम गिरिजा मैं रिंकल के सिर्फ़ बालों को छू रहा था. देखो कितने सुंदर बाल हैं” ये कह कर वो मेरे पास आकर वापस मेरे बालों पर हाथ फेरने लगे. मैं गुस्से से तिलमिला कर उनको धकेलते हुए उनसे दूर हो गयी. “रहने दो रहने दो मुझे आपकी सारी हरकतें मालूम हैं. आप बस मुझसे दूर ही रहिए” मैं रुवासि हो उठी. ” अरे रिंकल क्यों इनकी हरकतों को इतना सीरीयस लेती हो. अगर ये तुम्हारे बालों को चूमना चाहते हैं तो चूम लेने दो. इस से तुम्हारा क्या नुकसान होज़ायगा.” दीदी ने समझाते हुए कहा. “अरे दीदी ये जितने भोले बन रहे हैं ना उतने हैं नही” ” रिंकल अब मान भी जा” दीदी ने फिर कहा. ” ठीक है. लेकिन ये वादा करें कि सिर्फ़ मेरे बालों के अलावा कुछ भी नही छ्छूएँगे” मैने कहा “ठीक है मैं तुम्हारी दीदी की कसम लेकर कहता हूँ की सिर्फ़ तुम्हारे बालों को ही चूमूंगा उसके अलावा मैं और किसी अंग को नही छ्छूंगा. लेकिन अगर तुम खुद ही मुझे अपने बदन को छूने के लिए कह्दो फिर?” उन्हों ने मुझे छेड़ा “फिर आपकी जो मर्ज़ी कर लेना मैं कुछ भी नही कहूँगी. मैं भी कसम खाती हूँ कि आप अगर सिर्फ़ बालों को चूमे तो मैं कुछ भी नही कहूँगी” “देख लो बाद मे पीछे मत हटना” राकेश जी ने कहा. “जी मैं आप जैसी नही हूँ. जो कहती हूँ करके रहती हूँ.” “ठीक है जब तुम राज़ी हो ही गयी हो तो ये काम आराम से किया जाए. चलो बेड रूम मे. वहाँ बिस्तर पर लिटा कर आराम से चूमूंगा तुम्हरे बालों को” उन्हों ने चहकते हुए कहा. मैने और ज़्यादा बहस नही किया और चुपचाप उनके साथ हो ली. हम बेडरूम मे आ गये. मैं बिस्तर पर लेट गयी. और अपने बदन को ढीला छोड़ दिया.दीदी ने मेरे बालों को फैला दिया. जीजाजी बिस्तर पर मेरे बगल मे बैठ कर अपने हाथों मे मेरे बाल लेकर उन्हे चूमने लगे. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | धीरे धीरे उनके होंठ मेरे सिर तक आए. मेरे सिर पर बालों को तरह तरह से चूमा फिर मुझे पीछे घूमने को कहकर मेरे गर्देन मे अपने होंठ च्छुआ दिए. गर्दन पर पहली बार किसी मर्द की गर्म साँसों के पड़ने से मन मे एक बेचैनी सी होने लगी. फिर उन्हों ने मुझे सीधा किया और मेरे बालों से उतरकर उनके होंठ मेरे माथे को चूमने लगे. मैं ये महसूस करते ही चौंक उठी. “ये क्या कर रहे हो. आपने वादा किया था कि मेरे बालों के अलावा किसी अंग को नही छ्छूएँगे.” मैने उठने की कोशिश की. “मैं वही कर रहा हूँ जो मैने वादा किया था. मैं तुम्हारे बालों को ही चूम रहा हूँ. मैने ये कहाँ कहा था कि सिर्फ़ सिर के बालों को चूमना चाहता हूँ. हां अगर ये साबित कर दो कि तुम्हारे बदन पर सिर के अलावा कहीं और बाल नहीं हैं तो छोड़ दूँगा.” मुझे सारा कमरा घूमता हुआ सा लगा. मैं अपने ही जाल मे फँस चुकी थी. सिर, बगल, योनि पर ही क्या रोएँ तो पूरे शरीर पर ही होते हैं. उफफफ्फ़ ये मैं क्या कसम ले बैठी. लेकिन अब तो देर हो चुकी थी. उसके होंठ मेरे भोन्हो से सरकते हुए मेरी आँखों के पलकों पर आगाए. उनकी होंठों का हल्का हल्का स्पर्श मुझे मदहोश कर दे रहा था. मेरी पलकों पर से घूमते हुए वापस माथे पर आकर ठहरे. फिर नाक के ऊपर से धीरे धीरे नीचे सरकने लगे. स्पर्श इतना हल्का था मानो को मेरे बदन पर मोर पंख फिरा रहा हो. मेरे रोएँ उसके स्पर्श से खड़े हो जा रहे थे. अब उसके होंठ मेरे होंठो के ऊपर आकर ठहर गये. उनके और मेरे होंठों मे सिर्फ़ कुछ मिल्लिमेटेर की दूरी थी. मैं सख्ती से आँखे भींच कर उनके होंठों के स्पर्श का इंतेज़ार कर रही थी. ये क्या कुछ देर उसी जगह ठहरने के बाद उन्हों ने अपने होंठ वापस खींच लिए. मैं उनकी इस हरकत से झुंझला कर आँखें खोल दी. पता नही क्यों आज वो इतने निष्ठुर हो गये थे. रोज तो मुझे स्पर्श करने का बहाना ढूँढते थे. मगर आज जब मैं मन ही मन चाह रही थी को वो मुझे स्पर्श करें तो वो दूरी मेनटेन कर रहे थे. वो उठ कर बैठ गये. “इसके कपड़े उतार दो. कपड़ों के उपर से मैं कैसे पूरे बदन के बालों को चूम सकूँगा.” उन्हों ने कहा. दीदी ने मेरी तरफ देखा. मैने बैठते हुए अपने हाथ ऊपर करके अपनी राजा मंदी जता दी. दीदी ने मेरी कमीज़ उतार दी. टाइट ब्रा मे कसे मेरे स्तनो को देख कर राकेश जी की आँखें बड़ी बड़ी हो गयी. फिर दीदी ने मेरी ब्रा के हुक खोल दिए. ब्रा लूस होकर कंधे पर झूल गयी. मैने खूद अपने हाथों से उसे उतार कर तकिये के पास रख दी. मैने अपने स्तनो को अपने हाथों से धक लिया और शरमाते हुए राकेश जी की तरफ देखा. वो मुस्कुराते हुए अपनी मेरे बदन पर आँखें फिरा रहे थे. अब दीदी ने आगे बढ़कर मेरी सलवार का नाडा खोल दिया. मैने झट पास पड़ी चादर से अपने बदन को ढक लिया. दीदी ने चादर के अंदर हाथ बढ़ा कर मेरी सलवार खोल दी फिर मेरी छ्होटी सी पॅंटी को भी पैरों से उतार दिया मैं बिल्कुल नग्न हो कर लेट गयी. दीदी पास से हट गयी. राकेश जी वापस मेरे पास आकर बैठ गये. मेरे होंठो के ऊपर से बिना उन्हे च्छुए दो तीन बार अपने होठ घूमकर मेरे कानो की ओर सरक गये. उनकी गर्म साँसे अब मेरे कानो पर पड़ रही थी. मैं अब उत्तेजित होने लगी थी. कसम के कारण कुछ भी नही कर पा रही थी. बस अपने तकिये को मुत्ठियों से मसल रही थी. अब उनके होठ गले से होकर नीचे उतरने लगे. पहले उन्हों ने मुझे पेट के बल सुला दिया. फिर मेरे बदन पर से चादर हटा कर अपने होंठ मेरे गर्देन से होते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगे. रीढ़ की हड्ड़िक़े उपर ऊपर से लेकर मेरे कमर तक अपने होंठ फिराने लगे. कई बार तो मैं सिहरन से उच्छल पड़ती थी. मैने अपना चेहरा तकिये मे दबा रखा था. और दाँतों से तकिये को काट रही थी. उनके होठ पूरी पीठ पर फिरने के बाद उन्हों ने मुझे सीधा किया. अब मैने अपने बदन को च्चिपाने की कोई कोशिश नही की. मैं निर्लज्ज होकर अपनी दीदी की मौजूदगी मे ही उनके हज़्बेंड के सामने नग्न लेटी हुई थी. जीजा जी के होंठ मेरे गले से होते हुए मेरी चूचियो के पास आकर ठहरे. पहले उनके होठों ने मेरी चूचियो की परिक्रमा की फिर दोनो चूचियो के बीच की घाटी की सैर करने लगे. धीर धीरे उनके होंठ मेरे एक चूची पर चढ़ कर मेरे निपल के पास पहुँच गये. मेरे निपल्स उनके आगमन मे खड़े होकर एकदम सख़्त हो गये थे. राकेश जी अपने होठ मेरे निपल के चारों ओर फिराने लगे. हल्के हल्के से निपल के ऊपर भी फिराने लगे. मैं उत्तेजना से छटपटा रही थी. मुँह से अक्सर “आआहह ऊऊओह” जैसी आवाज़ें निकालने लगी मेरे पैर भी सिकुड़ने और खुलने लगे थे. मेरा सिर तकिये पर इधर उधर झटके ले रहा था. जी कर रहा था जीजा जी मेरे स्तनो को मसल मसल कर लाल कर दें. दोनो निपल्स को दन्तो से काट काट कर लहुलुहन कर दें मगर मैं किसी तरह अपने ऊपर कंट्रोल कर रही थी. उन्हों ने अपने होंठ खोले और उसे निपल के चारों ओर लगा कर गोल गोल फिराने लगे. मगर निपल पर बिल्कुल भी होंठ नही लगा रहे थे. मैं कतर आँखों से दीदी की ओर देखी. वो चुप चाप खड़ी हम दोनो की हरकतें देख रही थी. काफ़ी देर तक मेरे दोनो निपल्स के ऊपर अपने होंठ फिरने के बाद उनके होंठ मेरी नाभि की ओर बढ़ चले. नाभि के ऊपर काफ़ी देर तक होंठ फिराने के बाद बाकी पूरे पेट को चूमा. फिर नीचे की ओर सरक कर बिना मेरी योनि की तरफ बढ़े मेरे पैरों के पास आ गये. मेरे एक पैर को उठाकर उस पर अपने होंठ फिराने लगे. मुझ से अब रहा नही जा रहा था. उसके होंठ पंजों से सरकते हुए जांघों के अन्द्रूनि हिस्सों तक सफ़र करके वापस दूसरे पैर की तरफ लौट गये. आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मेरी योनि से रस चू रहा था. पूरी योनि गीली हो रही थी. अब दूसरे पैर से आगे बढ़ते हुए उनके होंठ मेरे जाँघो से होते हुए मेरी योनि पर उगे बालों पर फिरने लगे. पहले उन्हों ने मेरी योनि के ऊपर सामने की तरफ उगे बालों पर काफ़ी देर तक होंठ फिराए. फिर उनके होंठ नीचे की ओर उतरने लगे. मैने अपने पैरों को जितना हो सकता था उतना फैला दिया जिससे उन्हे किसी तरह की कोई बाधा महसूस ना हो. जब उनके होंठ चींटी की गति से चलते हुए मेरी योनि के मुँह पर आए तो मैं उबाल पड़ी. “ऊऊऊहह म्‍म्म्ममममाआआअ” करते हुए मैने अपने हाथों से उनके सिर को मेरी योनि पर दबा दिया. मैं अपनी कसम खुद ही तोड़ चुकी थी. अब मुझे कोई परवाह नही थी दुनिया की अब तो सिर्फ़ एक ही ख्वाहिश थी कि जीजा जी मेरे बदन को बुरी तरह नोच डालें. मेरी योनि मे अपना लिंग डाल कर मेरी खाज मिटा दें. मेरे मुँह से मेरे मन की भावना फुट पड़ी. “ऊऊओ जीएजजीीीइ अब और मत सताओ मैईईइ हाआअर गइई. प्लीईसए मुझे मसल डालो. प्लीईएआसए” उन्हे मेरी ओर से रज़ामंदी मिल चुकी थी. वो अपनी जीभ मेरी योनि मे प्रवेश करा दिए. मेरे बदन मे एक बिजली सी दौड़ गयी और मैने अपनी योनि ऊपर की ओर उठा दी. मेरा डिसचार्ज हो गया . मगर गर्मी बिल्कुल भी कम नही हुई. मैने हाथ बढ़ाकर पॅंट के ऊपर से उनके लिंग को भींच दिया. मैने पाया कि उनका लिंग एक दम तन के खड़ा हुआ था. उन्हों ने मेरी हालत समझ कर अपने चेहरे को मेरी योनि से उठा कर अपने कपड़े खोल दिए. वो भी बिल्कुल नग्न हो गये. फिर मेरी टाँगों को अपने हाथो से पकड़ कर फैला दिया और मेरी योनि के मुहाने पर अपना लिंग रख कर फिराने लगे. मैं अपनी योनि को उनके लिंग की तरफ उठा रही थी जिससे कि वो मेरे अंदर घुस जाए. मगर वो थे कि मुझे परेशान कर रहे थे. “ह्म्‍म्म रिंकल रानी बोलो क्या चाहिए.” उन्हों ने मुस्कुराते हुए पूचछा. “ऊऊओ क्यूँ सताते हो. प्लीज़ डाल दो इसे अंदर.” “नही पहले बताओ क्या चाहिए तुम्हे.” “आपका……..आपका लिंग……आपका लिंग” “क्यों? मेरा लिंग क्यों चाहिए तुम्हे? “मुझे चोद दो प्लीज़ अपने लिंग से मुझे चोदो खूब चोदो” मैं पूरी तरह बावली हो गयी थी. “उन्हु मैं नही देने वाला तुम्हे. तुम्हे अगर इसकी भूख लग रही है तो खुद ही डाल लो इसे अपने अंदर.” मैं अब रुक नही सकी. मैने एक हाथ की चार उंगलियों से अपनी योनि के द्वार को खोला औड दूसरे हाथ से उनके लिंग को छेद पर सेट करके अपने पैरों को उनकी कमर पर लप्पेट दिया और पूरे ज़ोर से अपनी कमर को उचकाया. उनका लिंग मेरी योनि को छीलता हुआ काफ़ी अंदर तक चला गया . मैं दर्द से कराह उठी “उईईईईईई माआअ दीईदीईए आआआहह” दीदी ने मेरे बालो पर हाथ फेरते हुए कहा “बस रिंकल थोड़ा सा और सब्र कर लो बस थोड़ा दर्द और होगा. सुनिए रिंकल का ये पहला मौका है थोड़ा धीरे धीरे करना बेचारी को दर्द ना हो” अब राकेश ने मुझे परेशान करना छोड़ कर अपने लिंग को कुछ बाहर निकाला और उसे वापस एक धक्के से अंदर कर दिया. उनका लिंग मेरी झिल्ली को फाड़ते हुए अंदर प्रवेस कर गया. मैं “आआआआआअहह हह” कर उठी. उनका लिंग पूरा मेरी योनि मे फँस चुक्का था. जैसे ही उन्हों ने वापस निकाला तो उसके साथ कुछ तरल प्रदार्थ भी बाहर निकल गया . अब पता नही वो रस था याँ मेरा खून. मेरी योनि मे लग रहा था मानो आग लगी हुई है. इतनी बुरी तरह जल रहा था मानो किसी ने उसे चीर के रख दिया हो. धीरे धीरे मेरा दर्द कम होने लगा और उसके जगह उत्तेजना ने लेली. वो मुझे अब ज़ोर ज़ोर से चोदने लगे. मैं भी अपनी कमर उछाल उछाल कर उसके लिंग को अपनी योनि मे ले रही थी. काफ़ी देर तक इसी तरह चोदने के बाद उन्होंने बिस्तर पर मुझे चौपाया बना कर पीछे से अपने लिंग को वापस मेरी योनि मे डाल दिया. मैं उनसे चुदती हुए दो बार पानी छोड़ चुकी थी. काफ़ी देर तक इसी तरह करने के बाद मुझे महसूस हुआ कि उनका लिंग फूल रहा है. उन्हों ने एक जोरदार धक्का मारा तो मैं अपने को सम्हाल नही पाई और बिस्तर पर मूह के बल गिर पड़ी वो भी मेरे ऊपर गिर पड़े और उनके लंड से एक तेज धार निकल कर मेरी योनि मे समाने लगी. हम दोनो यूँ ही पड़े पड़े हाँफ रहे थे. काफ़ी देर तक यूँ ही पड़े रहने के बाद वो उठने लगे “बस….” मैने उन्हे खींचा “इतनी जल्दी हार मान गये. अभी तो मैं आपके बालों को चूमूँगी” कहकर मैने उनके हाथ को पकड़ कर अपनी ओर खींचा. वो मेरे नंगे बदन पर गिर पड़े. मैने देखा दीदी जा चुकी थी. मैने उन्हे बिस्तर पर दबा कर लिटा दिया मैं उठकर उनकी जांघों पर बैठ गयी. मैने देखा जहाँ मैं लेटी थी वहाँ चादर खून से लाल हो रहा था. मैने उनके निपल्स पर अपनी जीभ फिराने के बाद उनके निपल्स को दाँतों से काटा और उनके होंठों पर अपने होंठ रह दिए. मैने अपनी जीभ उनके मुँह मे घुसा दी और उनके मुँह मे उसकी जीभ और दाँतों पर फिराने लगी. काफ़ी देर तक मैने उनके मुँह का रस पिया फिर उठ कर उनके ढीले पड़े लंड को देखा. पहले उस लिंग को एक किस किया फिर हाथ से सहलाते हुए उसे देखने लगी. उनकी लिंग पर अभी भी हमारा रस और कुछ कतरे खून के लगे थे. मैने तकिये के पास रखी अपनी ब्रा उठाकर उनके लिंग को पोछा. फिर अपनी जीभ निकाल कर उनके लिंग को ऊपर से नीचे तक चाटा. उनके बॉल्स पर भी अपनी जीभ फिराई. उनका लिंग वापस हरकत मे आने लगा था. फिर मैने उनके लिंग को अपने मुँह मे समा लिया और उनके लिंग को ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी. कुछ ही देर मे उनका लिंग पहले की तरह खड़ा हो गया. अब मैने उठ कर उनके कमर के दोनो ओर घुटनो को रख कर अपनी चूत की फांकों को अपने हाथों से फैलाया और उनके लिंग को अपनी योनि पर सटा कर धीरे धीरे उनके लिंग पर बैठ गयी. मुँह से एक आआहह निकली और उनका लिंग पहली चुदाई से दुख रही मेरी योनि की दीवारों को रगड़ता हुआ अंदर घुस गया. फिर मैं उनके लिंग पर बैठक लगाने लगी वो मेरी चूचियो को मसल मसल का लाल कर रहे थे. करीब पंद्रह मिनूट तक इसी तरह उन्हे चोदने के बाद मैं उनके सीने पर गिर पड़ी और मेरी योनि मे रस के फव्वारे छूट गये. फिर उन्हों ने मुझे लिटा कर मेरी कमर के नीच तकिया लगा कर मेरी योनि को ऊपर उठाया और मेरी टाँगों की अपने कंधे पर रख कर मेरी योनि मे अपना लिंग घुसाने लगे. मैं उनके लिंग को अपनी चूत को चीर कर एक एक इंच अंदर जाते हुए देख रही थी | आप लोग यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अपने लिंग को पूरी तरह अंदर करके वो धक्के मारने लगे. मेरे मुँह से भी “औ ऊहह उउईई” जैसी आवाज़ें निकल रही थी. मुझे अब मेरी योनि और पेट मे दर्द होने लगा था. करीब बीस मिनट तक मुझे चोदने के बाद उन्हों ने अपना माल मेरी योनि मे डाल दिया. उनके साथ साथ मेरा भी वीर्य निकल गया. हम दोनो बिस्तर पर लेटे लेटे हाँफ रहे थे. दीदी ने आकर मुझे सहारा देकर उठाया. मेरे पैर बोझ नही सह पा रहे थे. बाथरूम तक जाते जाते कई बार मेरे पैर लड़खड़ा गये. मुझे नहला धुला कर बिस्तर के हवाले कर दिया. कुछ देर रेस्ट कर के मैं तरो ताज़ा हो गयी. उस दिन और अगले दिन हम ने खूब चुदाई की. मेरा तो बस मन ही नही भर रहा था. अगले दिन शाम को मम्मी पापा लौट आए. उन्हों ने आकर सूचना दी कि मेरी शादी पक्की हो गयी है. मैं ये सुन कर मुस्कुरा दी. शादी तो मेरी अब पक्की हुई लेकिन सुहागरात तो पहले ही मन चुकी थी. समाप्त आप लोग इसे झूठी कहानी ना समझाना जो सच था वही लिखी हु | आप अपनी बात मुझे मेल कर दीजिये मै आप लोगो के मेल का इन्तेजार करुगी फिर अगली कहानी भेजूंगी [email protected]

The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें
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